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Aug 2, 2008

पलकों की दीवारों में न जाने क्या छिपाए बैठी हो
दर्द ऐसा कौनसा है जो लबों तक नही लाती हो
हम भी आशिक पुराने हैं कहे देते हैं
सीधे दिल का रास्ता निकाल लेते हैं